सिक्के के दो पहलु होते हैं , हो सकता है किसी एक पहलु ने किसी समय पे अपनी
नीचता दिखाई हो पर इसका मतलब ये कदापि नहीं कि सिक्के का दूसरा पहलू
हमेशा सच्चा और निर्णायक हो ! द्रौपदी के चीर -हरण पर भी सभा में बहुतों ने
आँखें गीली कि थीं पर उन में कई दुर्योधन के मित्र पहले भी थें और बाद में
भी बने रहें ! रात को किटी -पार्टी कीजिये , शराब के नशे में बीवी -बेटी
सबको धो डालिये , और १६ दिसंबर आते ही निर्भया , दामिनी और पता नहीं क्या
क्या के लिए आंसू बहाइये !बढ़िया है , समाज बदल जायेगा , देखिये कब तक -- मित्र विष्णु नारायण सिंह के वाल से साभार कुछ पंक्तियाँ !
पुरुष हवशी थे, जानवर है
स्त्री कहाँ कभी बस झूठी भी हो पाई थी ?!
आधे से ज्यादा जो पैरोकारी में है लगे
खोखले है, इलज़ाम और जुर्म में फर्क इन्हें दिखता नहीं
जब तक इलज़ाम खुद पर आ ना जाये
अंध-पैरोकारी का अंजाम कोई सीखता नहीं
जो पुरुष वासना में जल कर हो मर रहा
उसकी चिता सजाओ तुम
पर ज़रा उस स्त्री को भी अपनी सभा में खींच लाओ तुम
निर्भया की अंत्येष्टि पर जिसने अपने स्वार्थ की खीर पकाई है
ऐ पैरोकारों निवेदन तुमसे
निर्भया का शोक मनाओ,
जो ऐसे दरिन्दे कहीं मिल जाए
चमड़ी उधेड़ चौक टंगवाओं
पर जहाँ इल्जामों का खेल हो
वहां सुनो दोनों पक्षों की बात
पुरुष निकृष्ट, नीच, अधम
उसको भगवान ना मान लो
पर स्त्री भी हो सकती झूठी
इतना भी तुम जान लो !
पुरुष हवशी थे, जानवर है
स्त्री कहाँ कभी बस झूठी भी हो पाई थी ?!
आधे से ज्यादा जो पैरोकारी में है लगे
खोखले है, इलज़ाम और जुर्म में फर्क इन्हें दिखता नहीं
जब तक इलज़ाम खुद पर आ ना जाये
अंध-पैरोकारी का अंजाम कोई सीखता नहीं
जो पुरुष वासना में जल कर हो मर रहा
उसकी चिता सजाओ तुम
पर ज़रा उस स्त्री को भी अपनी सभा में खींच लाओ तुम
निर्भया की अंत्येष्टि पर जिसने अपने स्वार्थ की खीर पकाई है
ऐ पैरोकारों निवेदन तुमसे
निर्भया का शोक मनाओ,
जो ऐसे दरिन्दे कहीं मिल जाए
चमड़ी उधेड़ चौक टंगवाओं
पर जहाँ इल्जामों का खेल हो
वहां सुनो दोनों पक्षों की बात
पुरुष निकृष्ट, नीच, अधम
उसको भगवान ना मान लो
पर स्त्री भी हो सकती झूठी
इतना भी तुम जान लो !
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