Saturday, 26 January 2013

"क्या लोग थें वो दीवाने , क्या लोग थें वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी !"
सबसे पहले गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं आप सबों को , साथ ही साथ इस धरती को , माँ को , जन्मभूमि को , पालनकर्ता को,जीवनदाता को शत शत नमन ! सुबह नींद खुलते ही आज "ये मेरे वतन के लोगों " देशभक्ति गीत जब कानों में पड़ा , मेरा यकीं मानिये शरीर के सारे रोंगटे खड़े हो गए , आँखों में पानी और दिल की धड़कन बस एक यही बात चल रही थी वाकई कितना दिया है इस माँ ने हमें , इस देश के जवानों ने हमें , आज़ादी के लिए शहीद हुए क्रान्तिकारियो ने हमें , और इस समाज ने हमें ! वाकई अदभुत है यह देश , कुछ लोगों का पोस्ट और कमेंट मैंने पिछले 2-3 दिनों में देखा , पढ़ा जिसमें उन्हों ये लिखा था की भारत को रिपब्लिक डे मानाने का कोई मोरल राईट नहीं है ! मैं इससे सहमत नहीं हूँ ! दुनियां का कोई भी देश परफेक्ट नहीं है , न ही हो सकता है ! चुनौतियाँ सबके पास है , पर देखना ये चाहिए की किसके पास कितनी चुनौतियाँ हैं और वो इनसे कितनी शिद्दत से लड़ते हुए संघर्षरत है ! मेरा दावा ही इस बात का सवा अरब की आबादी वाला कोई भी देश जिसको बिलकुल लूट कर छोड़ा गया हो , तहस नहस कर के छोड़ा गया हो , जिसके पास भूतकाल से लेकर वर्तमान काल तक बाहरी और अंदरी चुनौतियों की इतनी लम्बी लिस्ट हो , अगर वो हिंदुस्तान के अलावा कोई दूसरा देश होता तो अपनी अंतिम सांसें ले चूका होता , पर सलाम है सवा अरब आबादी के उस जज्बे को , भारत माँ को, उसके बेटे को , कन्याकुमारी से लेकर हिमालय तक की पावन धरा को , जो अभी भी चुनौतियों से लड़ने में विश्वास रखता है और लड़ रहा है ! आइये आज इस पावन दिवस पर ये संकल्प लें की हम एक अच्छे नागरिक का दायित्व निभाते हुए , हमारे सामने जो भी चुनौतियाँ हैं या आएँगी , उनका डट कर एक साथ मुकाबला करेंगे , एक सुखी राष्ट्र , सुखद भविष्य की कामना करते हुए , बहुत -बहुत शुभकामनायों के साथ -
"मुझे तोड़ लेना बनमाली , उस पथ पर देना तुम फ़ेंक ,
मातृभूमि पे शीश चढाने , जिस पथ जाते वीर अनेक !
(हे माँ शायद कभी मौका मिले , तुम्हारे लिए कुछ कर पाने का , कुर्बान होने का ! जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी के साथ आपसे विदा लेते हुए आपका अवनीश !)

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