Thursday, 14 February 2013


कुछ ऐसे दोस्तों की खातिर , जिनका दिल कभी न कभी सचे मन से किसी न किसी के लिए धड़का हो!----------------
प्रेम एक शाश्वत सत्य है और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया भी ! इस दुनिया से जब सामना हुआ तब माँ ने गालों पे चुम्बन लेकर प्यार किया , जबान पे तोतली आवाज़ आई तो माता -पिता के साथ बहुत सारे लोग ने प्यार की भाषा बोली और मैंने भी उनके साथ ! दुनियां और समाज की थोड़ी समझ हुई तो समाज ने मुझे प्यार किया और मैंने समाज को भी ! तुम भी इसी दुनियां और समाज का हिस्सा थी , पर जो एक बात जिसका जवाब मैं खुद अपने आप को भी आज तक नहीं दे पाया - इतना सारा प्यार और इतना सारे लोगों का प्यार पाने के बाद भी मैंने तुम्हारे प्यार को सबसे ऊपर क्यूँ मान लिया , क्यूँ तुम्हारे प्यार के बाद औरों का प्यार मुझे वैसे ही मालूम पड़ा जैसे बहुत ज्यादा मीठी मिठाई खाने के बाद फीकी लगने वाली चाय ! सचमुच अनसुलझी गुथी की तरह वीराने में , रात के अँधेरे में भी सोचता हूँ की कोई तो हो जो इस सवाल का जवाब दे और गर मैंने कोई गलती की है तो मुझे बताये की क्या ?

"तुझे पाने की जुस्तजू में , तेरी खुशियों की खातिर
तेरी पलकों पे आंसू न आये , तेरी सिसकियाँ रोकने की खातिर
तेरी हर मुराद पूरी की , अपनी खुशियों की हर किश्त तुझ पे अता की है
नशे उल्फत में अनसुलझा मैं , पूछता फिरता मैंने क्या खता की है ?"(अवनीश)

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