Monday, 24 December 2012

बुझ बुझ कर अब जल रहा हूँ मैं
तेरी याद में बहाले ख़स्त मचल रहा हूँ मैं
तेरे नशे इश्क में ऐसे लडखडाये कदम
की अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
आवारगी, बेचारगी , दिल्लगी , दीवानगी
सब देखी है मैंने तेरी उल्फत में
तेरी यादों ने एक घर सा बना रखा है मेरे सीने में
सुबह शाम उसी घर में टहल रहा हूँ मैं !
किस किस का एहतिराम करूँ , क्या ये सारे एहतिशाम करूँ
दुःख तो सबने दिया है किस किस को बदनाम करूँ
तेरी याद है , तेरी तस्वीर है , तेरी आँखें हैं , तू न सही
बस इन्ही को देखकर दिन रात बहल रहा हूँ मैं
तेरे नशे इश्क में ऐसे लडखडाये कदम
की अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
हाँ दोस्तों अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
(24 दिसम्बर की रात किसी की याद में आंसुओं में लिखी गई ये ग़ज़ल ! शायद दुनियां में अच्छी लगने वाली चीज़ें इसलिए हैं की उसे आप पा नहीं सकतें ! आपका अवनीश ! अभी उर्दू साहित्य का अध्ययन कर रहा हूँ , इसलिए उर्दू के भी कुछ शब्द मिलेंगे , जिनका मतलब इस प्रकार है -
बहाले ख़स्त- in miserable condition
एहतिराम-respect
एहतिशाम- wealth , money )

Saturday, 22 December 2012

तुम्हें सजने सवरनें का बहुत शौक था
    और मुझे तुम्हारे  प्यार में जलते रहने का ,
तुम सजती रहो , संवरती रहो
              और मैं खुद को जलाता रहूँगा
तुमने मुझे पाकर खो दिया है
         पर मैं तुम्हें खो कर भी पाता  रहूँगा !
कभी पापा के लिए , कभी मम्मी के लिए
कभी खुद के लिए ठुकराया है तुमने मुझे
      अब मैं तुम्हें
हर घड़ी , हर पल ठुकराता रहूँगा ,
तुम्हें खो कर भी पाता रहूँगा !
तितली का फड़फडाना , कोयल का कूकना
      भौरों का गुनगुनाना और मेरा दर्द में भी मुस्काना
ये तमाम चीज़ें गवाह हैं इस बात की
       की प्यार , इश्क सब समपर्ण का ही दूसरा नाम है
ये गीत मैं ताउम्र अपने होंठों से गाता रहूँगा
      प्रिये ! मैं तुम्हें खो कर भी पाता रहूँगा !
(ये कविता प्यार में खुद्दारी के लिए लिखी है , इसे कृपा कर के मेरा अहंकार न समझे ! किसी की याद में , किसी के लिए लिखी हुई ये कविता , आपका अवनीश !)
     

देश बहुत गुस्से में है , हर जगह एक ज्वालामुखी सी फूट पड़ी है और फूटनी चाहिए भी ! उन दरिंदों के लिए फांसी ही एक मात्र सजा है और उनकी बेशर्म , बेगैरत दरिन्दे जाति के और लोगों को पता भी चलना चाहिए की इतने बड़े गुनाह की सजा कितनी बड़ी हो सकती है ! पर मुझे थोड़ी सी चिंता इस बात को लेकर है की क्या फांसी दे देने से बलात्कार होने बंद हो जायेंगे ! पूरे देश के इतने गुस्से में होने के बाद भी आज मऊ में फिर से बलात्कार हुआ है ! मेरी सोच ये कहती है की ये बलात्कार और बलात्कारी सृष्टी के कई नियमों के साथ साथ जो पूरी मनुष्य जाती ने छेड़ छाड़ की है उसका भी परिणाम है ! बाजारवाद , स्त्री को सिर्फ एक देह समझना , भोग की वस्तु समझना , भौतिकवाद सारे इस समस्या की जड़ हैं ! बलात्कार की कोई भी न्यूज़ किसी भी चैनल पे देखिये उसके बाद गिन के चार विज्ञापन (Advertisement) देखिये , बॉडी स्प्रे , मिथुन कोंडोम , सुंदरी कैटरीना वाली माजा पेय पदार्थ (maaza cold drink )आदि -आदि ,सारे बस और बस यही दिखाते हैं की नारी एक शरीर मात्र है , देह मात्र है जो अपने देह मात्र से भावनाओं को उतेजित कर के सफलता हासिल कर सकती है ! आज के दौर में थोड़ी बहुत समस्या पुरुष जाति के पास भी है की अब वो किस नारी की पूजा करे , उस नारी की जिसके लिए उसकी मर्यादा , उसका संस्कार , उसकी इज्जत इतना महत्व रखती थी की उस अहिल्या को छूने से पापी डरते थें की कहीं भस्म न हो जाऊ !पुरुष के साथ साथ अब नारी जाती को भी ये सोचना होगा की उनसे चूक कहाँ हुई ! हांथों में लाल मिर्च का पाउडर और ब्लेड की जगह क्या होना चाहिए जिससे पापी रावण को भी सोचना पड़े की महीनों अशोक वाटिका में सीता को रख तो सकते हैं पर छू नहीं सकते , क्यूंकि डर सीता से नहीं सीता की मर्यादा पालन और उसकी शक्ति से है ! मुझसे कल किसी ने कहा की लगभग हर एक लड़के के अन्दर एक बलात्कारी छिपा हुआ है , जो भावनाओं के माध्यम से , प्यार जता के एक लड़की के साथ हमबिस्तर होना चाहते हैं पर माफ़ करना बहिन , इस प्यार का बाज़ार लगाने के लिए जितना पुरुष जिम्मेदार है उतना ही स्त्री भी ! भावनाओं और संवेदनाओं के साथ समय के साथ खेलना दोनों पक्षों ने सीख लिया है ! आशा है बहिन तुम मेरी बातों का सही अर्थ निकल पाओगी ! जयशंकर प्रशाद ने कभी कहा था - अबला नारी तुम्हारी यही कहानी , आँचल में है दूध आँखों में है पानी ! पर जब न आँचल रहा , न उसमे दूध और न ही आँखों में पानी और दो बच्चों की माँ होने पर भी न मांग में सिंदूर तब शायद प्रकृति के नियम टूटने लगे ! स्कूल ,कॉलेज, बार और ऑफिस की कैंटीन में सिगरेट के छले उड़ाते हुए अपने पुरुष मित्रों की टोली के नॉन वेज जोक्स पे जब आप अपना ताल ठोकती हैं तब एक बात आप जरुर याद रखना की कमोबेश पुरुष आज भी तुमसे वही करुणा , वही इज्जत , वही मर्यादा , वही संवेदना चाहता है जिसकी बदौलत तुम अहिल्या थी , दुर्गा थी , काली थी , अनुसूया थी और प्रसाद ने कहा था की -
"नारी तुम केवल श्रधा हो , विश्वास रजत पग तल में
पियूष श्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल में "
(ये मेरे अपने विचार हैं , आप इससे सहमत या असहमत हो सकते हैं , अपनी प्रतिक्रिया खुल कर दे सकते हैं - आपका अवनीश !)

Tuesday, 18 December 2012


"यत्र नारी पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता " मतलब औरतों की जहाँ पूजा होती है वहां पे देवता का निवास होता है , इस तरह की सोच को लेकर चलने वाली दुनिया की सबसे अच्छी सभ्यता वाले देश में ये घटना वाकई इस बात की निशानी है की हम मनुष्य से पशु होते जा रहे हैं ! संदेह है मुझे इतनी दरिंदगी तो पशुओं में भी नहीं होती होगी !इतना वहशीपन , छिः छिः , शर्म से पुरुषों का सर झुक जाता है  जब कोई पुरुष ,जिसे इस धरा पर स्त्रियों की रक्षा के लिए भेजा गया था , ऐसी घिनौनी हरकत करता है ! किस बात का अभिमान है तुम्हें लड़कों और पुरुष जात के नाम पे झूठ का सीना ठोकने वालों , एक बात याद रखना -
दिल को बहलाने का सामान न समझा जाये
लड़कियों को इतना भी आसान न समझा जाये
ये भी हमारी तरह जीने का हक चाहतीं  हैं
इसे गद्दारी का एलान न समझा जाये ,
अरे अब तो बेटे भी चले जाते हैं बाप से रुखसत होकर
सिर्फ बेटी को ही घर का मेहमान न समझा जाये !

Wednesday, 12 December 2012

कुर्सी का इतना घमंड , इतना अहंकार  तो सिर्फ कहानियों में सुना था , अब चाची के राज में देखने को मिल गया जहाँ फरुखाबाद की लुइस भाभी , जो देश के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद साहब की पत्नी हैं (हालाँकि ज्यादा  पहचान उनकी विकलांग घोटाले के कारण है ) ने आज दो विकलांगों के ऊपर गाडी चढ़ा दी ! उन दोनों विकलांगों ने बहुत बड़ा जुर्म किया था - अपनी प्रिय लुइस भाभी से अपने वैसाखियों का हिसाब मांग  लिया था , की महाचोरनी मेरे नाम के वैसाखी का अगर पैसा तूने डकार लिया तो फिर चमचमाती कार में क्यूँ चल रही , वैसाखी के सहारे ही चल ! अल्लाह करे की उन विकलागों की प्रार्थना  सच हो जाये और भाभी 2014 में वैसाखियों पे आ जाये , आखिर  हो भी क्यूँ न -
न कमरा जान पाता है , न अंगनाई समझती है
देवर का दिल कहाँ अटका है , ये बस भौजाई समझती है !((मेरे हर दिल अज़ीज़ मुन्नवर साहब-  )
(आपको लिखता रहूँगा , व्यस्तता से समय निकालकर , आपका अवनीश )