"यत्र नारी पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता " मतलब औरतों की जहाँ पूजा होती है वहां पे देवता का निवास होता है , इस तरह की सोच को लेकर चलने वाली दुनिया की सबसे अच्छी सभ्यता वाले देश में ये घटना वाकई इस बात की निशानी है की हम मनुष्य से पशु होते जा रहे हैं ! संदेह है मुझे इतनी दरिंदगी तो पशुओं में भी नहीं होती होगी !इतना वहशीपन , छिः छिः , शर्म से पुरुषों का सर झुक जाता है जब कोई पुरुष ,जिसे इस धरा पर स्त्रियों की रक्षा के लिए भेजा गया था , ऐसी घिनौनी हरकत करता है ! किस बात का अभिमान है तुम्हें लड़कों और पुरुष जात के नाम पे झूठ का सीना ठोकने वालों , एक बात याद रखना -
दिल को बहलाने का सामान न समझा जाये
लड़कियों को इतना भी आसान न समझा जाये
ये भी हमारी तरह जीने का हक चाहतीं हैं
इसे गद्दारी का एलान न समझा जाये ,
अरे अब तो बेटे भी चले जाते हैं बाप से रुखसत होकर
सिर्फ बेटी को ही घर का मेहमान न समझा जाये !

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