Thursday, 18 July 2013

In the memory of 23 children who lost their lives after having mid day meal in School in Bihar and a Question from them .

           सुशासन

चारों तरफ सिर्फ सुशासन ही सुशासन है ,
नमो से भी लम्बा -चौड़ा आपका ये भाषण है ,
न रोटी मांग रहा हूँ , न किताब मांग रहा हूँ
खिला कर 23 क्यूँ मार दिया , बस इसी का हिसाब मांग रहा हूँ !
कंकाल सा शरीर , बड़ा सा दिल और दो बेबस आँखें
मिड डे मील के भरोसे दिन ,और भूखी रातें
क्या ये भी इस सुशासन में तेरे लिए ज्यादा थीं ?
गर हाँ तो फिर गलती है मुझे पैदा करना बिधाता की !
न मैं अल्लाह मानता हूँ , न मैं भगवान मानता हूँ
मैं इंसान को इंसान , और हैवान को हैवान मानता हूँ !
न मुझे मंदिर चाहिए , न मुझे मस्जिद चाहिए
मुझे दो वक़्त की रोटी , और एक वक़्त सुकून भरी नींद चाहिए !
(बिहार में स्कूल में मिड डे मौत (मिल)खाने से २३ बच्चों की मौत के बाद ये दिल अन्दर से कराह उठा है ! Laptop, Tab, shopping mall , Rangerover, Mercedes, सब बस एक करोड़ के लिए , बाकी 119 करोड़ को मौत का जहर खिला खिला कर मार दो )

Sunday, 14 July 2013



 सेक्युलर 


मैं पैगम्बर का हूँ , मैं भगवान का हूँ
मैं अब्दुल्ला का हूँ , मैं रहमान का हूँ
गालियाँ जितनी भी चाहे दे लो मुझे तुम सारे सेक्युलर
मैं अंतिम सांस तक कहूँगा , मैं बस हिंदुस्तान का हूँ !
मैं ईद की सेवई का हूँ , मैं दिवाली के पकवान का हूँ
मैं होली दशहरे का हूँ , मैं रमजान का हूँ
मुझे पता है सब नफरत फ़ैलाने की ये लम्बी साज़िश है
तभी तो कहता हूँ , मैं बस हिंदुस्तान का हूँ !
मैं पुरोहित का हूँ , मैं यजमान का हूँ ,
मैं उपनिषद का हूँ , मैं गरुड़  -पुराण का हूँ ,
मैं रामायण का हूँ , मैं कुरान का हूँ
सब ने इंसा को इंसा से दूर किया है इसलिए ,
मैं बाजारी(अशिष्ट )होकर कहता हूँ , मैं हिंदुस्तान का हूँ !
मैं काजी का हूँ , मैं पाजी का हूँ ,
मैं यीशु का हूँ , नाम मैं बुद्धा  का हूँ,
मैं शिव-बारात का हूँ , मैं शबे -रात का हूँ
सब ने कुर्सी के लिए अपनी अपनी दावें खेली हैं
मैंने अब जाकर अपनी आँखें खोली हैं !
सियासी भेड़ियों वक़्त की नब्ज़ पहचानो
इंसा की जात लो ,उसके ही मुंह से जानो ,
मैं थोड़ा सा हिन्दू , थोड़ा सा सिख ,
थोड़ा सा ईसाई , थोड़ा सा मुसलमान हूँ
मैं अपने आप में मुकम्मल हिंदुस्तान हूँ
मैं अपने आप में मुकम्मल हिंदुस्तान हूँ !
(अवनीश - आँखों को अच्छे सपने और दिल को अच्छे लोग मिलें इसी कामना के साथ शुभ रात्रि !)



"न देख ऐसी हिकारत से इस बेरंग चेहरे को ,
ये वही गाल हैं जिस पे कभी तेरे चुम्बन ने रंग जमाया था ! "
(अवनीश - प्यार को बुड्ढा मनुष्य का मस्तिष्क बनाता है , न की ह्रदय ! अगर आप किसी के साथ प्यार में हैं तो वहां मस्तिष्क का कोई काम नहीं , अगर प्यार के बाद वाली अवस्था में हैं तो वहां ह्रदय की कोई जरुरत नहीं क्यूंकि ह्रदय तब सिर्फ दुःख दे सकता है और बहुत लोगों को वो भी अच्छी लगती है ! )

Saturday, 13 July 2013

न मैं पैगम्बर का हूँ , न मैं भगवान का हूँ
न मैं अब्दुल्ला का हूँ , न मैं रहमान का हूँ
गालियाँ जितनी भी चाहे दे लो मुझे तुम सारे सेक्युलर
मैं अंतिम सांस तक कहूँगा , मैं बस हिंदुस्तान का हूँ !
न मैं ईद की सेवई का हूँ , न मैं दिवाली के पकवान का हूँ
न मैं होली दशहरे का हूँ , न मैं रमजान का हूँ
मुझे पता है सब नफरत फ़ैलाने की ये लम्बी साज़िश है
तभी तो कहता हूँ , मैं बस हिंदुस्तान का हूँ !
(अवनीश - कृपया भारतीय छद्म सेक्युलर इसे न पढ़ें ! सेक्युलर हा हा हा ! शब्द ही हंसने लायक होकर रह गया है )