In
the memory of 23 children who lost their lives after having mid day
meal in School in Bihar and a Question from them .
सुशासन
चारों तरफ सिर्फ सुशासन ही सुशासन है ,
नमो से भी लम्बा -चौड़ा आपका ये भाषण है ,
न रोटी मांग रहा हूँ , न किताब मांग रहा हूँ
खिला कर 23 क्यूँ मार दिया , बस इसी का हिसाब मांग रहा हूँ !
कंकाल सा शरीर , बड़ा सा दिल और दो बेबस आँखें
मिड डे मील के भरोसे दिन ,और भूखी रातें
क्या ये भी इस सुशासन में तेरे लिए ज्यादा थीं ?
गर हाँ तो फिर गलती है मुझे पैदा करना बिधाता की !
न मैं अल्लाह मानता हूँ , न मैं भगवान मानता हूँ
मैं इंसान को इंसान , और हैवान को हैवान मानता हूँ !
न मुझे मंदिर चाहिए , न मुझे मस्जिद चाहिए
मुझे दो वक़्त की रोटी , और एक वक़्त सुकून भरी नींद चाहिए !
(बिहार में स्कूल में मिड डे मौत (मिल)खाने से २३ बच्चों की मौत के बाद ये
दिल अन्दर से कराह उठा है ! Laptop, Tab, shopping mall , Rangerover,
Mercedes, सब बस एक करोड़ के लिए , बाकी 119 करोड़ को मौत का जहर खिला खिला
कर मार दो )
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