"न देख ऐसी हिकारत से इस बेरंग चेहरे को ,
ये वही गाल हैं जिस पे कभी तेरे चुम्बन ने रंग जमाया था ! "
(अवनीश - प्यार को बुड्ढा मनुष्य का मस्तिष्क बनाता है , न की ह्रदय ! अगर आप किसी के साथ प्यार में हैं तो वहां मस्तिष्क का कोई काम नहीं , अगर प्यार के बाद वाली अवस्था में हैं तो वहां ह्रदय की कोई जरुरत नहीं क्यूंकि ह्रदय तब सिर्फ दुःख दे सकता है और बहुत लोगों को वो भी अच्छी लगती है ! )
ये वही गाल हैं जिस पे कभी तेरे चुम्बन ने रंग जमाया था ! "
(अवनीश - प्यार को बुड्ढा मनुष्य का मस्तिष्क बनाता है , न की ह्रदय ! अगर आप किसी के साथ प्यार में हैं तो वहां मस्तिष्क का कोई काम नहीं , अगर प्यार के बाद वाली अवस्था में हैं तो वहां ह्रदय की कोई जरुरत नहीं क्यूंकि ह्रदय तब सिर्फ दुःख दे सकता है और बहुत लोगों को वो भी अच्छी लगती है ! )
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