इस देश में मैं जैसा की मानता हूँ सिर्फ दो समस्याएं जेहनी तौर पे हैं -
(1)या तो हम किसी भी आदमी को पूरी तरह साफ़ सुथरा , जिम्मेवार और भगवान की
शक्ल में देखना चाहते हैं (2) या तो हम किसी भी भ्रष्ट , चरित्रहीन
आदमी से उसकी तुलना करने लगते हैं और ये कहने लगते हैं की अगर पहले वाले
आदमी में सारी खूबियाँ एक साथ नहीं है तो वो भी हमारी पसंद का नहीं है !
आज देश में भी कुछ ऐसा ही माहौल है - एक तरफ भ्रष्ट व्यवस्था और उसे चलाने वाले भ्रष्ट लोग हैं तो दूसरी तरफ एक वो आदमी जो इस भ्रष्ट व्यवस्था और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ आन्दोलन चलाये हुए है ! अब हमारी सोच ये कहती है है ये आदमी इस भ्रष्ट व्यवस्था और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ इस लिए है की वो भी बाद में इसी भ्रष्ट व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहता है ! अरे भाई बाद की बाद में देख लेंगे , पहले अभी का तो सोच लो ! धरती , आकाश , पाताल सब लुट रहा है और तुम फरिस्ता खोजते हो जो आये और 100 % शुद्ध आत्मा के साथ 64 -65 सालों का पूरा कूड़ा एक साथ साफ़ कर दे ! मुझे नहीं पता की केजरीवाल और सिसोदिया के मन में कितना पाप है और सता पाकर वो भी कितना लूटना चाहते हैं इस देश को पर इतना जरुर कहूँगा की उनका मन कम से कम इन चोरों और संवेदनहीन लोगों से जो विकलागों का भी पैसा डकारने में एक पल नहीं सोचतें , उनसे तो साफ़ ही है !
वतन की फिकर कर नादान मुसीबत आने वाली है
तेरी बरबादियों के मशवरे हैं आसमानों में
न समझोगे तो मिट जाओगे हिन्दुस्तान वालों
तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में !
(इक़बाल साहब ने बहुत पहले ये कहा था पर आज मैं आपको याद दिलाता हूँ और ये सच है ! आपका अवनीश )
आज देश में भी कुछ ऐसा ही माहौल है - एक तरफ भ्रष्ट व्यवस्था और उसे चलाने वाले भ्रष्ट लोग हैं तो दूसरी तरफ एक वो आदमी जो इस भ्रष्ट व्यवस्था और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ आन्दोलन चलाये हुए है ! अब हमारी सोच ये कहती है है ये आदमी इस भ्रष्ट व्यवस्था और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ इस लिए है की वो भी बाद में इसी भ्रष्ट व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहता है ! अरे भाई बाद की बाद में देख लेंगे , पहले अभी का तो सोच लो ! धरती , आकाश , पाताल सब लुट रहा है और तुम फरिस्ता खोजते हो जो आये और 100 % शुद्ध आत्मा के साथ 64 -65 सालों का पूरा कूड़ा एक साथ साफ़ कर दे ! मुझे नहीं पता की केजरीवाल और सिसोदिया के मन में कितना पाप है और सता पाकर वो भी कितना लूटना चाहते हैं इस देश को पर इतना जरुर कहूँगा की उनका मन कम से कम इन चोरों और संवेदनहीन लोगों से जो विकलागों का भी पैसा डकारने में एक पल नहीं सोचतें , उनसे तो साफ़ ही है !
वतन की फिकर कर नादान मुसीबत आने वाली है
तेरी बरबादियों के मशवरे हैं आसमानों में
न समझोगे तो मिट जाओगे हिन्दुस्तान वालों
तुम्हारी दास्ताँ तक भी न होगी दास्तानों में !
(इक़बाल साहब ने बहुत पहले ये कहा था पर आज मैं आपको याद दिलाता हूँ और ये सच है ! आपका अवनीश )

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