Friday, 5 October 2012

robert vadra : National son-in-law

आप लोग खामोश क्यूँ बैठे हुए हैं , घरों से बाहर आइये लाठी डंडे के साथ और पीट डालिए , अरविन्द केजरीवाल , मनीष सिसोदिया और तमाम लोगों को ! अरे भाई कोई छोटी मोटी बात थोड़े ही हुई है , हमारे राष्ट्रीय दामाद के ऊपर उंगली उठाई नहीं बल्कि की गई है ! नहीं छोड़ेंगे इनको , ये क्या मजाक समझ रखा है , राजमाता के परिवार के ऊपर ऐसी वैसी बातें बोलते रहते हैं ! आज रात भर नींद नहीं आएगी दिग्विजय सिंह , सलमान खुर्शीद , महामौन सिंह  और हो सकता है अपने राष्ट्रपति जो को भी ! गडकरी साहब से लेकर आडवानी जी भी अपने पुत्र , पुत्रवधू , बेटी दामाद सबको फ़ोन करके बता रहे होंगे भाई गड़बड़ करो पर थोडा सतर्क हो कर ! मेरा कवि मन ऐसी  स्थितियों को देखकर  चार पंक्तियाँ लिख डालता है , इन नेताओं की बेबसी और बेचारगी पर -
"दिग्विजय सिंह के चेहरे का रंग सर्द होने लगा
ऐसा लगता है सोनिया जी को सर दर्द होने  लगा ,
रात सपने में बडबडा उठे मनमोहन जी ,
यार गुरशरण (उनकी माननीय पत्नी )ऐसी सियासत क्यूँ की मैंने
चोरी माता ने की और दामन मेरा  गर्द गर्द होने लगा !
(आपका अवनीश )

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