Saturday, 8 September 2012

KYA KHOYA KYA PAYA

किसी भी व्यक्ति के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए या तो उसके साथ रहना जरुरी है  , या फिर उसके बारे में उसके द्वारा या किसी और के द्वारा लिखी गई बातों को पढना ! कुछ ऐसा ही हुआ आज अटल बिहारी वाजेपाई जी को पढ़कर "क्या खोया क्या पाया " में ! पूरी पुस्तक की समीक्षा मैं बस एक पंक्ति  में करना चाहूँगा - "किसी कवि या लेखक के अन्दर का व्यक्तित्व कभी भी मर नहीं सकता चाहे वो कितना भी बड़ा राजनेता या अभिनेता क्यूँ न हो जाये ! इति श्री , शुभ रात्रि !

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