Sunday, 2 September 2012

जंगल "Raj"


देश के अन्दर नहीं बल्कि देश के साथ भ्रस्टाचार करने वाले राज ठाकरे के लिए मेरी तरफ से (बल्कि तमाम बिहारवासियों और समस्त भारतवासी जो राज ठाकरे को सर्कस के शेर के अलावा कुछ भी नहीं समझतें ) की तरफ से चार पंक्तियाँ -

वो नफरतों का दिया मुसल्सल जलाते रहें
हमारे प्यार की छोटी सी चिराग उन पे भारी है
क्यूंकि उनके तो खानदानी रग ही में सियासत और नफरत है
हम तो बुद्ध और महावीर के भोले बिहारी हैं !

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