Monday, 16 December 2013

सिक्के के दो पहलु होते हैं , हो सकता है किसी एक पहलु ने किसी समय पे अपनी नीचता दिखाई हो पर इसका मतलब ये कदापि नहीं कि सिक्के का दूसरा पहलू हमेशा सच्चा और निर्णायक हो ! द्रौपदी के चीर -हरण पर भी सभा में बहुतों ने आँखें गीली कि थीं पर उन में कई दुर्योधन के मित्र पहले भी थें और बाद में भी बने रहें ! रात को किटी -पार्टी कीजिये , शराब के नशे में बीवी -बेटी सबको धो डालिये , और १६ दिसंबर आते ही निर्भया , दामिनी और पता नहीं क्या क्या के लिए आंसू बहाइये !बढ़िया है , समाज बदल जायेगा , देखिये कब तक -- मित्र विष्णु नारायण सिंह के वाल से साभार कुछ पंक्तियाँ !
पुरुष हवशी थे, जानवर है
स्त्री कहाँ कभी बस झूठी भी हो पाई थी ?!
आधे से ज्यादा जो पैरोकारी में है लगे
खोखले है, इलज़ाम और जुर्म में फर्क इन्हें दिखता नहीं
जब तक इलज़ाम खुद पर आ ना जाये
अंध-पैरोकारी का अंजाम कोई सीखता नहीं
जो पुरुष वासना में जल कर हो मर रहा
उसकी चिता सजाओ तुम
पर ज़रा उस स्त्री को भी अपनी सभा में खींच लाओ तुम
निर्भया की अंत्येष्टि पर जिसने अपने स्वार्थ की खीर पकाई है
ऐ पैरोकारों निवेदन तुमसे
निर्भया का शोक मनाओ,
जो ऐसे दरिन्दे कहीं मिल जाए
चमड़ी उधेड़ चौक टंगवाओं
पर जहाँ इल्जामों का खेल हो
वहां सुनो दोनों पक्षों की बात
पुरुष निकृष्ट, नीच, अधम
उसको भगवान ना मान लो
पर स्त्री भी हो सकती झूठी
इतना भी तुम जान लो !

Saturday, 14 September 2013


पिछले कुछ दिनों में दोनों सम्प्रदायों के कई ऐसे दोस्तों से बात हुई की जो मुझे इस मुज़फ्फरनगर के दंगे को सही ठहराते मिले !कोई कह रहा था कि नहीं ये जरूरी था होना , जब से उत्तरप्रदेश में अखिलेश कि सरकार आई तब से मुस्लिमो का मन बहुत बढ़ गया था इसलिए ये हुआ ! कोई कह रहा था हम तो अल्पसंख्यक हैं इसलिए हमें परेशां किया जा रहा है ! काहे का मुस्लिम का मन बढ़ना भाई और काहे के तुम अल्पसंख्यक ! दोनों तरफ के लोगों को मैं जवाब देता हूँ , अगर हिम्मत है तो जबाब देकर बताना !सियासत जो चाहता है वही करते हो फिर भी सियासत को गाली देते हो ! दोनों तरफ के मूर्खों संभल जाओ और गर नहीं तो मेरा जवाब सुनो -
"
तुम्हारी माँ ने क्या कभी अपने लाल खोए हैं
घर वाले छाती पीट-पीट के क्या कभी रोए हैं
गाँव के गाँव दहशत में जाग रहे ,
कुत्ते सड़कों पे चैन की नींद सोए हैं !
कभी तेरे बहनों की राखी टूटी है , भाई की किस्मत फूटी है
नई-नवेली दुल्हन की क्या कभी ऐसे चूड़ियाँ टूटी हैं
मुझे मालुम है इन सब का उत्तर "नहीं " है ,
तभी कहते हो दोस्त की ये दंगा सही है !
(अवनीश )!






"जिसकी वफादारी के किस्से मैंने बरसों यारों में सुनाएं
आज उसे बेवफा कह भी दूँ , तो यकीं कौन करेगा
महताब देख कर उसे महबूब कह देने वाला मैं ही था
अब अगर उसे मामूली सी सूरत कह दूँ , तो यकीं कौन करेगा !
यक़ीनन यकीं वही होता है दुनियां को ,जो बरसों सुनाया जाये
गीत वही गाती सारी दुनिया , जिसे हर लब पे गुनगुनाया जाये
बिछड़ कर हम तुम अकेले -अकेले जी रहे ,हम दोनों जानते हैं
ये छोटी सी बात सरे -बज्म बताई  जाये , तो यकीं कौन करेगा !
अपने इश्क पे यकीं करूँ, या उसको झूठा कहूँ
तुझ बिन खुद को बेसब्र कहूँ , या अन्दर से टूटा-फूटा कहूँ
उलफ़त के इस मारे का जख्म भला अब कौन भरेगा
आज तुझे बेवफा कह भी दूँ तो यकीं कौन करेगा !
(आपका अवनीश )

Thursday, 18 July 2013

In the memory of 23 children who lost their lives after having mid day meal in School in Bihar and a Question from them .

           सुशासन

चारों तरफ सिर्फ सुशासन ही सुशासन है ,
नमो से भी लम्बा -चौड़ा आपका ये भाषण है ,
न रोटी मांग रहा हूँ , न किताब मांग रहा हूँ
खिला कर 23 क्यूँ मार दिया , बस इसी का हिसाब मांग रहा हूँ !
कंकाल सा शरीर , बड़ा सा दिल और दो बेबस आँखें
मिड डे मील के भरोसे दिन ,और भूखी रातें
क्या ये भी इस सुशासन में तेरे लिए ज्यादा थीं ?
गर हाँ तो फिर गलती है मुझे पैदा करना बिधाता की !
न मैं अल्लाह मानता हूँ , न मैं भगवान मानता हूँ
मैं इंसान को इंसान , और हैवान को हैवान मानता हूँ !
न मुझे मंदिर चाहिए , न मुझे मस्जिद चाहिए
मुझे दो वक़्त की रोटी , और एक वक़्त सुकून भरी नींद चाहिए !
(बिहार में स्कूल में मिड डे मौत (मिल)खाने से २३ बच्चों की मौत के बाद ये दिल अन्दर से कराह उठा है ! Laptop, Tab, shopping mall , Rangerover, Mercedes, सब बस एक करोड़ के लिए , बाकी 119 करोड़ को मौत का जहर खिला खिला कर मार दो )

Sunday, 14 July 2013



 सेक्युलर 


मैं पैगम्बर का हूँ , मैं भगवान का हूँ
मैं अब्दुल्ला का हूँ , मैं रहमान का हूँ
गालियाँ जितनी भी चाहे दे लो मुझे तुम सारे सेक्युलर
मैं अंतिम सांस तक कहूँगा , मैं बस हिंदुस्तान का हूँ !
मैं ईद की सेवई का हूँ , मैं दिवाली के पकवान का हूँ
मैं होली दशहरे का हूँ , मैं रमजान का हूँ
मुझे पता है सब नफरत फ़ैलाने की ये लम्बी साज़िश है
तभी तो कहता हूँ , मैं बस हिंदुस्तान का हूँ !
मैं पुरोहित का हूँ , मैं यजमान का हूँ ,
मैं उपनिषद का हूँ , मैं गरुड़  -पुराण का हूँ ,
मैं रामायण का हूँ , मैं कुरान का हूँ
सब ने इंसा को इंसा से दूर किया है इसलिए ,
मैं बाजारी(अशिष्ट )होकर कहता हूँ , मैं हिंदुस्तान का हूँ !
मैं काजी का हूँ , मैं पाजी का हूँ ,
मैं यीशु का हूँ , नाम मैं बुद्धा  का हूँ,
मैं शिव-बारात का हूँ , मैं शबे -रात का हूँ
सब ने कुर्सी के लिए अपनी अपनी दावें खेली हैं
मैंने अब जाकर अपनी आँखें खोली हैं !
सियासी भेड़ियों वक़्त की नब्ज़ पहचानो
इंसा की जात लो ,उसके ही मुंह से जानो ,
मैं थोड़ा सा हिन्दू , थोड़ा सा सिख ,
थोड़ा सा ईसाई , थोड़ा सा मुसलमान हूँ
मैं अपने आप में मुकम्मल हिंदुस्तान हूँ
मैं अपने आप में मुकम्मल हिंदुस्तान हूँ !
(अवनीश - आँखों को अच्छे सपने और दिल को अच्छे लोग मिलें इसी कामना के साथ शुभ रात्रि !)



"न देख ऐसी हिकारत से इस बेरंग चेहरे को ,
ये वही गाल हैं जिस पे कभी तेरे चुम्बन ने रंग जमाया था ! "
(अवनीश - प्यार को बुड्ढा मनुष्य का मस्तिष्क बनाता है , न की ह्रदय ! अगर आप किसी के साथ प्यार में हैं तो वहां मस्तिष्क का कोई काम नहीं , अगर प्यार के बाद वाली अवस्था में हैं तो वहां ह्रदय की कोई जरुरत नहीं क्यूंकि ह्रदय तब सिर्फ दुःख दे सकता है और बहुत लोगों को वो भी अच्छी लगती है ! )

Saturday, 13 July 2013

न मैं पैगम्बर का हूँ , न मैं भगवान का हूँ
न मैं अब्दुल्ला का हूँ , न मैं रहमान का हूँ
गालियाँ जितनी भी चाहे दे लो मुझे तुम सारे सेक्युलर
मैं अंतिम सांस तक कहूँगा , मैं बस हिंदुस्तान का हूँ !
न मैं ईद की सेवई का हूँ , न मैं दिवाली के पकवान का हूँ
न मैं होली दशहरे का हूँ , न मैं रमजान का हूँ
मुझे पता है सब नफरत फ़ैलाने की ये लम्बी साज़िश है
तभी तो कहता हूँ , मैं बस हिंदुस्तान का हूँ !
(अवनीश - कृपया भारतीय छद्म सेक्युलर इसे न पढ़ें ! सेक्युलर हा हा हा ! शब्द ही हंसने लायक होकर रह गया है )

Thursday, 14 February 2013


कुछ ऐसे दोस्तों की खातिर , जिनका दिल कभी न कभी सचे मन से किसी न किसी के लिए धड़का हो!----------------
प्रेम एक शाश्वत सत्य है और निरंतर चलने वाली प्रक्रिया भी ! इस दुनिया से जब सामना हुआ तब माँ ने गालों पे चुम्बन लेकर प्यार किया , जबान पे तोतली आवाज़ आई तो माता -पिता के साथ बहुत सारे लोग ने प्यार की भाषा बोली और मैंने भी उनके साथ ! दुनियां और समाज की थोड़ी समझ हुई तो समाज ने मुझे प्यार किया और मैंने समाज को भी ! तुम भी इसी दुनियां और समाज का हिस्सा थी , पर जो एक बात जिसका जवाब मैं खुद अपने आप को भी आज तक नहीं दे पाया - इतना सारा प्यार और इतना सारे लोगों का प्यार पाने के बाद भी मैंने तुम्हारे प्यार को सबसे ऊपर क्यूँ मान लिया , क्यूँ तुम्हारे प्यार के बाद औरों का प्यार मुझे वैसे ही मालूम पड़ा जैसे बहुत ज्यादा मीठी मिठाई खाने के बाद फीकी लगने वाली चाय ! सचमुच अनसुलझी गुथी की तरह वीराने में , रात के अँधेरे में भी सोचता हूँ की कोई तो हो जो इस सवाल का जवाब दे और गर मैंने कोई गलती की है तो मुझे बताये की क्या ?

"तुझे पाने की जुस्तजू में , तेरी खुशियों की खातिर
तेरी पलकों पे आंसू न आये , तेरी सिसकियाँ रोकने की खातिर
तेरी हर मुराद पूरी की , अपनी खुशियों की हर किश्त तुझ पे अता की है
नशे उल्फत में अनसुलझा मैं , पूछता फिरता मैंने क्या खता की है ?"(अवनीश)

Saturday, 26 January 2013

"क्या लोग थें वो दीवाने , क्या लोग थें वो अभिमानी
जो शहीद हुए हैं उनकी, जरा याद करो कुर्बानी !"
सबसे पहले गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत शुभकामनाएं आप सबों को , साथ ही साथ इस धरती को , माँ को , जन्मभूमि को , पालनकर्ता को,जीवनदाता को शत शत नमन ! सुबह नींद खुलते ही आज "ये मेरे वतन के लोगों " देशभक्ति गीत जब कानों में पड़ा , मेरा यकीं मानिये शरीर के सारे रोंगटे खड़े हो गए , आँखों में पानी और दिल की धड़कन बस एक यही बात चल रही थी वाकई कितना दिया है इस माँ ने हमें , इस देश के जवानों ने हमें , आज़ादी के लिए शहीद हुए क्रान्तिकारियो ने हमें , और इस समाज ने हमें ! वाकई अदभुत है यह देश , कुछ लोगों का पोस्ट और कमेंट मैंने पिछले 2-3 दिनों में देखा , पढ़ा जिसमें उन्हों ये लिखा था की भारत को रिपब्लिक डे मानाने का कोई मोरल राईट नहीं है ! मैं इससे सहमत नहीं हूँ ! दुनियां का कोई भी देश परफेक्ट नहीं है , न ही हो सकता है ! चुनौतियाँ सबके पास है , पर देखना ये चाहिए की किसके पास कितनी चुनौतियाँ हैं और वो इनसे कितनी शिद्दत से लड़ते हुए संघर्षरत है ! मेरा दावा ही इस बात का सवा अरब की आबादी वाला कोई भी देश जिसको बिलकुल लूट कर छोड़ा गया हो , तहस नहस कर के छोड़ा गया हो , जिसके पास भूतकाल से लेकर वर्तमान काल तक बाहरी और अंदरी चुनौतियों की इतनी लम्बी लिस्ट हो , अगर वो हिंदुस्तान के अलावा कोई दूसरा देश होता तो अपनी अंतिम सांसें ले चूका होता , पर सलाम है सवा अरब आबादी के उस जज्बे को , भारत माँ को, उसके बेटे को , कन्याकुमारी से लेकर हिमालय तक की पावन धरा को , जो अभी भी चुनौतियों से लड़ने में विश्वास रखता है और लड़ रहा है ! आइये आज इस पावन दिवस पर ये संकल्प लें की हम एक अच्छे नागरिक का दायित्व निभाते हुए , हमारे सामने जो भी चुनौतियाँ हैं या आएँगी , उनका डट कर एक साथ मुकाबला करेंगे , एक सुखी राष्ट्र , सुखद भविष्य की कामना करते हुए , बहुत -बहुत शुभकामनायों के साथ -
"मुझे तोड़ लेना बनमाली , उस पथ पर देना तुम फ़ेंक ,
मातृभूमि पे शीश चढाने , जिस पथ जाते वीर अनेक !
(हे माँ शायद कभी मौका मिले , तुम्हारे लिए कुछ कर पाने का , कुर्बान होने का ! जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी के साथ आपसे विदा लेते हुए आपका अवनीश !)

Sunday, 20 January 2013

GIVE A HUGE ROUND OF APPLAUSE TO YOURSELVES AND MUST READ AND REPLY !
कांग्रेस पार्टी की जयपुर में चल रही चिंतन शिविर समाप्त हो गई ! हम सबों को खुश होना चाहिए कि देश की सबसे बड़ी पार्टी जिसका कोई कानून नहीं है (ये मैं नहीं कह रहा , राहुल बाबा आज ही खुद अपने मुंह से कह चुके हैं ) ने "BANANA REPUBLIC " में रह रहे HUM " MANGO PEOPLE" की चिंता करते हुए आजादी के 66 सालों में पहली बार चिंतन शिविर किया ! पर इस चिंतन शिविर से जो कुछ फायदे हुए वो इस प्रकार हैं -
(1) राहुल बाबा को कांग्रेस का दो नम्बरी नेता घोषित किया गया ! नया क्या है इस में पर , अरे दोस्तों ये वही राहुल बाबा हैं जो दलितों के यहाँ खाना भी तभी खाते हैं जब देश की पूरी इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया इनको " CAPTURE AND HIGHLIGHTED " करने के लिए तैयार खड़ी हो ! देश के सबसे ज्यादा युवा जहाँ होते हैं चाहे दामिनी बलात्कार केस हो या अन्ना का आन्दोलन वहां इनको पहुँचने की फुर्सत तो छोड़ ही दीजिये , बोलने की भी नहीं है पर युवाओं के बारे में सबसे ज्यादा बोलते हैं !
(2 ) पूरे देश को पता चला की राजमाता भी कभी भावुक हो सकती हैं , वो रोती भी हैं ! जी हाँ वही महारानी सोनिया गाँधी जी , कल रात राहुल बाबा के पास जाकर रोई ! हरियाणा में बलात्कार के बाद दलित की बेटी की हत्या हो या देश की सीमा पे सेना का जवान शहीद हो , चाची के आंसू ने कभी भी आँख का साथ नहीं दिया पर आज अफ़सोस --------- चाची फूट -फूट कर रोईं !
(3) महामौन जी ने आज अपने उसी चिंतन शिविर में कह दिया की "विकास करने के लिए महेंगाई बढ़ानी पड़ती है "! पर ये नहीं बताया की किसका विकास करने के लिए ! कलमाड़ी का , सलमान खुर्शीद का , अपनी रिमोट कण्ट्रोल जवान और बूढी शीला चाची का , देश के तमाम नेताओं का या खुद अपने आप का ! खैर वो क्यूँ बोलेंगे ऐसे भी बेचारे 8-9 सालों में 200-300 शब्द ही बोले हैं ! "ठीक है " !

सुशील शिंदे जैसे घटिया बयानबाज के बारे में अगले ब्लॉग में बात करूँगा , फ़िलहाल इतना ही समझ कर जवाब दीजियेगा !
(पर बधाई देता हूँ आप सबों की ताकत को जिसने कम से कम इस बात के लिए मजबूर कर दिया की " चिंतन "और चिंता अभी से ही शुरू हो गई है !ये सब आपकी जागरूकता का परिणाम है ! ये " पब्लिक " है सब जानती है ! आपका अवनीश !)