बुझ बुझ कर अब जल रहा हूँ मैं
तेरी याद में बहाले ख़स्त मचल रहा हूँ मैं
तेरे नशे इश्क में ऐसे लडखडाये कदम
की अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
आवारगी, बेचारगी , दिल्लगी , दीवानगी
सब देखी है मैंने तेरी उल्फत में
तेरी यादों ने एक घर सा बना रखा है मेरे सीने में
सुबह शाम उसी घर में टहल रहा हूँ मैं !
किस किस का एहतिराम करूँ , क्या ये सारे एहतिशाम करूँ
दुःख तो सबने दिया है किस किस को बदनाम करूँ
तेरी याद है , तेरी तस्वीर है , तेरी आँखें हैं , तू न सही
बस इन्ही को देखकर दिन रात बहल रहा हूँ मैं
तेरे नशे इश्क में ऐसे लडखडाये कदम
की अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
हाँ दोस्तों अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
(24 दिसम्बर की रात किसी की याद में आंसुओं में लिखी गई ये ग़ज़ल ! शायद दुनियां में अच्छी लगने वाली चीज़ें इसलिए हैं की उसे आप पा नहीं सकतें ! आपका अवनीश ! अभी उर्दू साहित्य का अध्ययन कर रहा हूँ , इसलिए उर्दू के भी कुछ शब्द मिलेंगे , जिनका मतलब इस प्रकार है -
बहाले ख़स्त- in miserable condition
एहतिराम-respect
एहतिशाम- wealth , money )
तेरी याद में बहाले ख़स्त मचल रहा हूँ मैं
तेरे नशे इश्क में ऐसे लडखडाये कदम
की अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
आवारगी, बेचारगी , दिल्लगी , दीवानगी
सब देखी है मैंने तेरी उल्फत में
तेरी यादों ने एक घर सा बना रखा है मेरे सीने में
सुबह शाम उसी घर में टहल रहा हूँ मैं !
किस किस का एहतिराम करूँ , क्या ये सारे एहतिशाम करूँ
दुःख तो सबने दिया है किस किस को बदनाम करूँ
तेरी याद है , तेरी तस्वीर है , तेरी आँखें हैं , तू न सही
बस इन्ही को देखकर दिन रात बहल रहा हूँ मैं
तेरे नशे इश्क में ऐसे लडखडाये कदम
की अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
हाँ दोस्तों अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
(24 दिसम्बर की रात किसी की याद में आंसुओं में लिखी गई ये ग़ज़ल ! शायद दुनियां में अच्छी लगने वाली चीज़ें इसलिए हैं की उसे आप पा नहीं सकतें ! आपका अवनीश ! अभी उर्दू साहित्य का अध्ययन कर रहा हूँ , इसलिए उर्दू के भी कुछ शब्द मिलेंगे , जिनका मतलब इस प्रकार है -
बहाले ख़स्त- in miserable condition
एहतिराम-respect
एहतिशाम- wealth , money )














