Monday, 24 December 2012

बुझ बुझ कर अब जल रहा हूँ मैं
तेरी याद में बहाले ख़स्त मचल रहा हूँ मैं
तेरे नशे इश्क में ऐसे लडखडाये कदम
की अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
आवारगी, बेचारगी , दिल्लगी , दीवानगी
सब देखी है मैंने तेरी उल्फत में
तेरी यादों ने एक घर सा बना रखा है मेरे सीने में
सुबह शाम उसी घर में टहल रहा हूँ मैं !
किस किस का एहतिराम करूँ , क्या ये सारे एहतिशाम करूँ
दुःख तो सबने दिया है किस किस को बदनाम करूँ
तेरी याद है , तेरी तस्वीर है , तेरी आँखें हैं , तू न सही
बस इन्ही को देखकर दिन रात बहल रहा हूँ मैं
तेरे नशे इश्क में ऐसे लडखडाये कदम
की अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
हाँ दोस्तों अब तलक संभल रहा हूँ मैं !
(24 दिसम्बर की रात किसी की याद में आंसुओं में लिखी गई ये ग़ज़ल ! शायद दुनियां में अच्छी लगने वाली चीज़ें इसलिए हैं की उसे आप पा नहीं सकतें ! आपका अवनीश ! अभी उर्दू साहित्य का अध्ययन कर रहा हूँ , इसलिए उर्दू के भी कुछ शब्द मिलेंगे , जिनका मतलब इस प्रकार है -
बहाले ख़स्त- in miserable condition
एहतिराम-respect
एहतिशाम- wealth , money )

Saturday, 22 December 2012

तुम्हें सजने सवरनें का बहुत शौक था
    और मुझे तुम्हारे  प्यार में जलते रहने का ,
तुम सजती रहो , संवरती रहो
              और मैं खुद को जलाता रहूँगा
तुमने मुझे पाकर खो दिया है
         पर मैं तुम्हें खो कर भी पाता  रहूँगा !
कभी पापा के लिए , कभी मम्मी के लिए
कभी खुद के लिए ठुकराया है तुमने मुझे
      अब मैं तुम्हें
हर घड़ी , हर पल ठुकराता रहूँगा ,
तुम्हें खो कर भी पाता रहूँगा !
तितली का फड़फडाना , कोयल का कूकना
      भौरों का गुनगुनाना और मेरा दर्द में भी मुस्काना
ये तमाम चीज़ें गवाह हैं इस बात की
       की प्यार , इश्क सब समपर्ण का ही दूसरा नाम है
ये गीत मैं ताउम्र अपने होंठों से गाता रहूँगा
      प्रिये ! मैं तुम्हें खो कर भी पाता रहूँगा !
(ये कविता प्यार में खुद्दारी के लिए लिखी है , इसे कृपा कर के मेरा अहंकार न समझे ! किसी की याद में , किसी के लिए लिखी हुई ये कविता , आपका अवनीश !)
     

देश बहुत गुस्से में है , हर जगह एक ज्वालामुखी सी फूट पड़ी है और फूटनी चाहिए भी ! उन दरिंदों के लिए फांसी ही एक मात्र सजा है और उनकी बेशर्म , बेगैरत दरिन्दे जाति के और लोगों को पता भी चलना चाहिए की इतने बड़े गुनाह की सजा कितनी बड़ी हो सकती है ! पर मुझे थोड़ी सी चिंता इस बात को लेकर है की क्या फांसी दे देने से बलात्कार होने बंद हो जायेंगे ! पूरे देश के इतने गुस्से में होने के बाद भी आज मऊ में फिर से बलात्कार हुआ है ! मेरी सोच ये कहती है की ये बलात्कार और बलात्कारी सृष्टी के कई नियमों के साथ साथ जो पूरी मनुष्य जाती ने छेड़ छाड़ की है उसका भी परिणाम है ! बाजारवाद , स्त्री को सिर्फ एक देह समझना , भोग की वस्तु समझना , भौतिकवाद सारे इस समस्या की जड़ हैं ! बलात्कार की कोई भी न्यूज़ किसी भी चैनल पे देखिये उसके बाद गिन के चार विज्ञापन (Advertisement) देखिये , बॉडी स्प्रे , मिथुन कोंडोम , सुंदरी कैटरीना वाली माजा पेय पदार्थ (maaza cold drink )आदि -आदि ,सारे बस और बस यही दिखाते हैं की नारी एक शरीर मात्र है , देह मात्र है जो अपने देह मात्र से भावनाओं को उतेजित कर के सफलता हासिल कर सकती है ! आज के दौर में थोड़ी बहुत समस्या पुरुष जाति के पास भी है की अब वो किस नारी की पूजा करे , उस नारी की जिसके लिए उसकी मर्यादा , उसका संस्कार , उसकी इज्जत इतना महत्व रखती थी की उस अहिल्या को छूने से पापी डरते थें की कहीं भस्म न हो जाऊ !पुरुष के साथ साथ अब नारी जाती को भी ये सोचना होगा की उनसे चूक कहाँ हुई ! हांथों में लाल मिर्च का पाउडर और ब्लेड की जगह क्या होना चाहिए जिससे पापी रावण को भी सोचना पड़े की महीनों अशोक वाटिका में सीता को रख तो सकते हैं पर छू नहीं सकते , क्यूंकि डर सीता से नहीं सीता की मर्यादा पालन और उसकी शक्ति से है ! मुझसे कल किसी ने कहा की लगभग हर एक लड़के के अन्दर एक बलात्कारी छिपा हुआ है , जो भावनाओं के माध्यम से , प्यार जता के एक लड़की के साथ हमबिस्तर होना चाहते हैं पर माफ़ करना बहिन , इस प्यार का बाज़ार लगाने के लिए जितना पुरुष जिम्मेदार है उतना ही स्त्री भी ! भावनाओं और संवेदनाओं के साथ समय के साथ खेलना दोनों पक्षों ने सीख लिया है ! आशा है बहिन तुम मेरी बातों का सही अर्थ निकल पाओगी ! जयशंकर प्रशाद ने कभी कहा था - अबला नारी तुम्हारी यही कहानी , आँचल में है दूध आँखों में है पानी ! पर जब न आँचल रहा , न उसमे दूध और न ही आँखों में पानी और दो बच्चों की माँ होने पर भी न मांग में सिंदूर तब शायद प्रकृति के नियम टूटने लगे ! स्कूल ,कॉलेज, बार और ऑफिस की कैंटीन में सिगरेट के छले उड़ाते हुए अपने पुरुष मित्रों की टोली के नॉन वेज जोक्स पे जब आप अपना ताल ठोकती हैं तब एक बात आप जरुर याद रखना की कमोबेश पुरुष आज भी तुमसे वही करुणा , वही इज्जत , वही मर्यादा , वही संवेदना चाहता है जिसकी बदौलत तुम अहिल्या थी , दुर्गा थी , काली थी , अनुसूया थी और प्रसाद ने कहा था की -
"नारी तुम केवल श्रधा हो , विश्वास रजत पग तल में
पियूष श्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल में "
(ये मेरे अपने विचार हैं , आप इससे सहमत या असहमत हो सकते हैं , अपनी प्रतिक्रिया खुल कर दे सकते हैं - आपका अवनीश !)

Tuesday, 18 December 2012


"यत्र नारी पूजयन्ते रमन्ते तत्र देवता " मतलब औरतों की जहाँ पूजा होती है वहां पे देवता का निवास होता है , इस तरह की सोच को लेकर चलने वाली दुनिया की सबसे अच्छी सभ्यता वाले देश में ये घटना वाकई इस बात की निशानी है की हम मनुष्य से पशु होते जा रहे हैं ! संदेह है मुझे इतनी दरिंदगी तो पशुओं में भी नहीं होती होगी !इतना वहशीपन , छिः छिः , शर्म से पुरुषों का सर झुक जाता है  जब कोई पुरुष ,जिसे इस धरा पर स्त्रियों की रक्षा के लिए भेजा गया था , ऐसी घिनौनी हरकत करता है ! किस बात का अभिमान है तुम्हें लड़कों और पुरुष जात के नाम पे झूठ का सीना ठोकने वालों , एक बात याद रखना -
दिल को बहलाने का सामान न समझा जाये
लड़कियों को इतना भी आसान न समझा जाये
ये भी हमारी तरह जीने का हक चाहतीं  हैं
इसे गद्दारी का एलान न समझा जाये ,
अरे अब तो बेटे भी चले जाते हैं बाप से रुखसत होकर
सिर्फ बेटी को ही घर का मेहमान न समझा जाये !

Wednesday, 12 December 2012

कुर्सी का इतना घमंड , इतना अहंकार  तो सिर्फ कहानियों में सुना था , अब चाची के राज में देखने को मिल गया जहाँ फरुखाबाद की लुइस भाभी , जो देश के विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद साहब की पत्नी हैं (हालाँकि ज्यादा  पहचान उनकी विकलांग घोटाले के कारण है ) ने आज दो विकलांगों के ऊपर गाडी चढ़ा दी ! उन दोनों विकलांगों ने बहुत बड़ा जुर्म किया था - अपनी प्रिय लुइस भाभी से अपने वैसाखियों का हिसाब मांग  लिया था , की महाचोरनी मेरे नाम के वैसाखी का अगर पैसा तूने डकार लिया तो फिर चमचमाती कार में क्यूँ चल रही , वैसाखी के सहारे ही चल ! अल्लाह करे की उन विकलागों की प्रार्थना  सच हो जाये और भाभी 2014 में वैसाखियों पे आ जाये , आखिर  हो भी क्यूँ न -
न कमरा जान पाता है , न अंगनाई समझती है
देवर का दिल कहाँ अटका है , ये बस भौजाई समझती है !((मेरे हर दिल अज़ीज़ मुन्नवर साहब-  )
(आपको लिखता रहूँगा , व्यस्तता से समय निकालकर , आपका अवनीश )

Saturday, 24 November 2012

आज देश में कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं या चीजें हुईं हैं  जो इस प्रकार हैं -
1.   2 जी   घोटाले  पौने दो करोड़  का घोटाला  है या नहीं इस पे देश की सबसे बड़ी दो पार्टियाँ घमासान कर रही है ! यानि अब घोटाला होना कोई बड़ा मुद्दा नहीं है बल्कि दुःख इस बात का दोनों को है की ये बड़ा घोटाला है या नहीं
2.  कांग्रेस ने आगे दो सालों के लिए सी .बी . आई . का निदेशक एक ऐसे आदमी को बना दिया है जो उनके लिए ही काम  करेगा  और वो मुलायम और मायावती दोनों को सी .बी . आई . के डर  से ही 2014 तक शांत रखेंगे !
3. अरविंद  केजरीवाल ने " आम आदमी पार्टी " की घोषणा कर दी है !
फैसला आप कर लीजिये की कौन सी घटना आप के हित और देश के हित के लिए हुई है ! देश हम सबका है और 2014 भी आने ही वाला है !

( आपका अवनीश )

Sunday, 18 November 2012

बहुत दिनों बाद आज घर से वपिस चेन्नई लौटा और facebook  and BLOG पे भी, मन थोड़ा भी नहीं लग रहा है ! घर की तमाम यादें , परिवार और दोस्तों के साथ बिताये हुए लम्हात जहाँ मानस पटल पर अभी भी तैर रहे हैं वहीं एक बार फिर से वही प्यारे Roommates ,दोस्तों को देखकर अच्छा भी लग रहा है और मन में थोड़ी सी राहत भी है -
कोयल बोले या गौरैया अच्छा लगता है
आपने शहर में भैया सब कुछ अच्छा लगता है !

Saturday, 13 October 2012

इस देश में मैं जैसा की मानता हूँ सिर्फ दो समस्याएं जेहनी तौर पे हैं - (1)या तो हम किसी भी आदमी को पूरी तरह साफ़ सुथरा , जिम्मेवार और भगवान की शक्ल में देखना चाहते हैं   (2)   या तो हम किसी भी भ्रष्ट , चरित्रहीन आदमी से उसकी तुलना करने लगते हैं और ये कहने लगते हैं की अगर पहले वाले आदमी में सारी खूबियाँ एक साथ नहीं है तो वो भी हमारी पसंद का नहीं है !
आज देश में भी कुछ ऐसा ही माहौल है  - एक तरफ भ्रष्ट व्यवस्था और उसे  चलाने वाले भ्रष्ट लोग हैं तो दूसरी तरफ एक वो आदमी जो इस भ्रष्ट  व्यवस्था और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ आन्दोलन चलाये हुए है ! अब हमारी सोच ये कहती है है ये आदमी इस भ्रष्ट  व्यवस्था और भ्रष्ट लोगों के खिलाफ इस लिए है की वो भी बाद में इसी भ्रष्ट  व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहता है ! अरे भाई बाद की बाद में देख लेंगे , पहले अभी का तो सोच लो ! धरती , आकाश , पाताल सब लुट रहा है और तुम फरिस्ता खोजते हो जो आये और   100  %    शुद्ध आत्मा के साथ  64 -65   सालों का पूरा कूड़ा एक साथ साफ़ कर दे ! मुझे नहीं पता की केजरीवाल और सिसोदिया के मन में कितना पाप है और सता पाकर वो भी कितना लूटना चाहते हैं इस देश को पर इतना जरुर कहूँगा  की  उनका मन कम से कम इन चोरों और संवेदनहीन लोगों से जो विकलागों का भी पैसा डकारने में एक पल नहीं सोचतें , उनसे तो साफ़ ही है !

वतन  की  फिकर  कर  नादान  मुसीबत  आने  वाली  है
तेरी  बरबादियों  के  मशवरे  हैं  आसमानों  में

न  समझोगे  तो  मिट  जाओगे  हिन्दुस्तान  वालों
तुम्हारी  दास्ताँ तक  भी  न  होगी  दास्तानों  में !
(इक़बाल साहब ने बहुत पहले ये कहा था पर आज मैं आपको याद दिलाता हूँ और ये सच है ! आपका अवनीश )

Monday, 8 October 2012

जब मैं या आप सभी पांचवी , छठी क्लास में पढ़ते थे , तब परीक्षा में प्रश्नपत्र में सबसे ऊपर लिखा होता था : सभी प्रश्नों के उतर देना अनिवार्य (जरुरी )है ! मुझे लगता है आज राजनीती में जितने भी लोग हैं (चाहे भाजपा वाले हों या कांग्रेस , बी.एस. पी., सपा आदि ) ये सारे जब पढ़ते थें तब शायद इनके लिए ऐसा होता होगा  की किसी भी प्रश्नों के उतर देना  जरुरी नहीं है ! (१)कर्नाटक में अवैध खनन क्यूँ हुआ (२)सोनिया जी कितनी बार और किसके खर्चे पे किस हैसियत से विदेश गईं (३) राष्ट्रीय जामाता या दामाद को  SPG  PROTECTION  SARKARI BUNGLOW क्यूँ मिली है जब वो किसी भी सरकारी पद पे नहीं हैं  (४) रॉबर्ट वाड्रा के पास ऐसी कौन सी तकनीक है जो 50    लाख को  300  करोड़ में बदल देती है और अगर है तो आर्थिक संकट के इस दौर में भारत के भलाई के लिए लोगों को क्यूँ नहीं बतातें !  (५) अगर अरविन्द केजरीवाल , किरण बेदी , कुमार विश्वास की जांच हो सकती है तो वाड्रा साहब की क्यूँ नहीं हो सकती !

दिमाग मत लगाइए आप लोग , क्यूंकि मैंने पहले ही कह दिया है सोनिया , येदुरापा , सलमान खुर्शीद , राशिद अल्वी  आदि सारे लोग जब पढ़ते थें तब टीचर ने इनको पहले ही बता दिया था की बेटा आप लोगों को इस    Banana  republic  में   इन मैंगो पीपल (आम जनता )  के  किसी भी सवाल के जवाब देने की जरुरत नहीं है ! केजरीवाल जी के लिए एक शायरी मेरे वंश के बड़े शायर मुन्नवर राना साहब की तरफ से
"कौन सी बात कहाँ , कैसे और कब कही जाती है
अगर ये सलीका हो तो हर बात सुनी जाती है !
(जवाब जरुर दीजियेगा , आपका अवनीश !)

Friday, 5 October 2012

robert vadra : National son-in-law

आप लोग खामोश क्यूँ बैठे हुए हैं , घरों से बाहर आइये लाठी डंडे के साथ और पीट डालिए , अरविन्द केजरीवाल , मनीष सिसोदिया और तमाम लोगों को ! अरे भाई कोई छोटी मोटी बात थोड़े ही हुई है , हमारे राष्ट्रीय दामाद के ऊपर उंगली उठाई नहीं बल्कि की गई है ! नहीं छोड़ेंगे इनको , ये क्या मजाक समझ रखा है , राजमाता के परिवार के ऊपर ऐसी वैसी बातें बोलते रहते हैं ! आज रात भर नींद नहीं आएगी दिग्विजय सिंह , सलमान खुर्शीद , महामौन सिंह  और हो सकता है अपने राष्ट्रपति जो को भी ! गडकरी साहब से लेकर आडवानी जी भी अपने पुत्र , पुत्रवधू , बेटी दामाद सबको फ़ोन करके बता रहे होंगे भाई गड़बड़ करो पर थोडा सतर्क हो कर ! मेरा कवि मन ऐसी  स्थितियों को देखकर  चार पंक्तियाँ लिख डालता है , इन नेताओं की बेबसी और बेचारगी पर -
"दिग्विजय सिंह के चेहरे का रंग सर्द होने लगा
ऐसा लगता है सोनिया जी को सर दर्द होने  लगा ,
रात सपने में बडबडा उठे मनमोहन जी ,
यार गुरशरण (उनकी माननीय पत्नी )ऐसी सियासत क्यूँ की मैंने
चोरी माता ने की और दामन मेरा  गर्द गर्द होने लगा !
(आपका अवनीश )

Saturday, 29 September 2012

 रिटेल में एफ.डी.आई .(F.D.I.IN RETAIL)पिछले 15 दिनों से जब टेलीविजन या अख़बार खोल रहा हूँ  यही  विषय देखने को मिल रहा है !  10 चैनलों पे  20  संवैधानिक गुंडे (जिनको हम विभिन्न राजनितिक पार्टियों के नेता भी कह सकते हैं ),कुछ आर्थिक सलाहकार , कुछ चर्चा चक्रवर्ती और एक  न्यूज़ एंकर  सारे  मिलकर इसी बात पे बहस कर रहे होते हैं की F.D.I.IN RETAIL आने से क्या लाभ होगा और क्या हानि ! भाजपा वाले कह रहे हैं की करोड़ों लोग बेरोजगार हो जायेंगे तो महारानी एंटोनिया के सिपाहियों (कांग्रेसियों ) का कहना है की 10 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा और किसानों को भारतीय मंडी पे बाध्य होकर कम दामों में अनाज बेचने की टेंशन से मुक्ति मिलेगी  ! साहब मैं  इस विवाद में नहीं पडूंगा की फायदा क्या होगा और नुकसान क्या होगा (आप खुद अपनी राय बनाकर मुझे बता सकते हैं ) बल्कि मेरा कहना बस इतना है की सत्ता पे काबिज़ देश के भारत भाग्य बिधाताओं , अब और  कितना किसानों का उपहास करोगे ! क्या अब दलित राजनीती , मुस्लिम वोट और सेकुलरिज्म की राजनीती, बंगलादेश से आये 25  लाख अवैध वोटबैंक  की गन्दी राजनीती से आपका मन इतना उब गया है ,जो अब किसानों के बारे में बोलकर उनकी दुखती रग पे हाँथ रखना चाहते हो  ! बिदर्भ के किसानों  की आत्महत्या का इतना घिनौना मजाक तो कम से कम आप दोनों एक साथ मिलकर न बनाओ की आप ये कहना शुरू  कर दो की इस देश के किसानों के लिए भी हम सोचा करते हैं और वो भी सिर्फ इसलिए क्यूंकि  2013 के विधानसभा चुनाव और २०१४  का लोकसभा चुनाव आपको  दिख रहा है ! इस देश की कुर्सी पे चाहे जो भी बैठता है पहले धोती वाले पंडित जी हों  या आज के पगड़ी वाले सरदार जी दोनों एक ही भाषा बोलते है पर अलग अलग वक़्त पर ! धोती वाले पंडित जी (अटल बिहारी वाजपई) ने भी अपने समय में  इसी F.D.I.IN RETAIL   की वकालत की थी  जिसकी आज महारानी के मौन सेनापति जी कर रहे हैं ! पंडित जी को चाहे  घुटने में दर्द होता है या महारानी को पेट में दर्द आप दोनों को हम पे इतना भरोसा नहीं है की आप अपना शरीर  हमारे हवाले छोड़ दें  और अमेरिका भागते हैं  तो फिर क्यूँ न  आपको अमेरिका के आटे और चावल पे भरोसा हो ! हो सकता है   चमचमाती polythene  में packed rapper  लगा हुआ अमेरिकन    दाल आपके चेहरे पे  ज्यादा लालिमा लाये जो शायद इस देश के किसान अपने खून और पसीने से उगाये गए अरहर दाल से अब तक  न ला पायें ! साहब बहुत मुश्किल है  इस देश में पक्ष और विपक्ष को समझना ! छोडिये किसानों को साहब अपना माल बनाइये , देखिये कहीं और लोहा , कोयला , थोरियम आपका इंतज़ार कर रहा होगा , कर दीजिये सबकी नीलामी और मरने दीजिये किसानों को ! रोने को मन करता है और बनारस के  बेनियाबाग के मुशायरे में जब गया था तो वहां कही हुई किसी शायर की चार  पंक्तियाँ  बरबस जुबान पे आ जाती है
" अगर ये सियासी लोग नदी के किनारे बस जातें
तो हम प्यासे बूंद बूंद को तरस जाते
वो तो शुक्र है बादलों पे इनका बस नहीं चलता
वरना सारे बादल इनके खेतों में बरस जातें !
(सुखद भारत की कल्पना में शुभ रात्रि , आपका अवनीश !)

Wednesday, 19 September 2012

अन्ना और अरविन्द केजरीवाल की राहें अलग अलग , अन्ना ने कहा राजनीति में नहीं आऊंगा और राजनीति में अपना नाम , अपनी फोटो कुछ भी नहीं इस्तेमाल करने दूंगा ! बात यहीं तक रहती तो गनीमत थी , "अब तो ये भी कह दिया कि केजरीवाल और उनके गुट के लोगों को अपने मंच पे चढने भी नहीं दूंगा !" महाशय अन्ना हजारे जी के ये तेवर देखकर व्यक्तिगत रूप से मुझे तो कहीं से  नहीं लगा कि ये राजघाट पे हर अनशन  से पहले जाने वाले किसी  महान गांधीवादी के तेवर और विचार हो सकते हैं ! अब बात कि जाये मुद्दे कि - कौन सही है और कौन गलत ? अजी ये भला मैं  कैसे बता सकता हूँ  और गर  यहाँ बता भी दिया तो फिर एक तरह से अपने विचार आप पे थोपने के जैसा हो जायेगा ! पर हाँ एक बात और - अपने घर के सामने एक नाला है , कई दिनों , या सालों से उस नाले से गन्दी पानी  कि बदबू आ रही है , सारा गाँव उस नाले कि बदबू और उससे फैलने वाली बीमारी से परेशान है पर उस नाले को साफ करने के लिए मैं गाँव के प्रधान के खिलाफ अनशन करूँगा , सरकार को बाध्य करने कि कोशिश करूँगा  कि आप चार सरकारी नौकर भेजकर उसकी सफाई करवाए , चाहे सरकार मानने को तैयार न हो  या मानने में इतने साल लगा दे कि तब  तक नाले से फैली महामारी से पूरा गाँव ही तबाह क्यूँ न हो जाये ! और जब अगले ही साल गाँव के प्रधान का चुनाव हो तब मैं सिर्फ उसमे इसलिए खड़ा नहीं होना चाहूँगा क्यूंकि ये प्रधान कि राजनीति , या सियासत का गलियारा बड़ा ही गन्दा है और उनका काम तो और भी गन्दा ! बात समझ में आ गई हो जरुर बताना ! हजारे जी RTI  हो या जनलोकपाल देशहित के किसी भी मुद्दे पे अनशन करने को तो आप  तैयार हो जाते हैं पर जब बड़े वाले सठियाए ठाकरे और छोटे वाले पगलाए ठाकरे उत्तरप्रदेश और बिहार के लोगों पे अंधाधुंध लाठियां और लात बरसाते हैं  तब अनशन तो दूर कि बात आप एक बयान भी नहीं देतें ! क्या ये भी आपकी राजनीति से दूर रहने कि जिद है या फिर महाराष्ट्र और मराठी मानुष कि राजनीति और पब्लिसिटी  करने  कि दबी हुई इच्छा ? अन्ना हजारे जी तो शायद जवाब न दें पर आप इसका जवाब जरुर दीजियेगा ! अपनी कुछ पंक्तियाँ :
" इंसानियत कम हो गई है , तो क्या ये जानकर  इंसान बनना छोड़ दें
ख़ुशी कम हो गई है ,   तो क्या ये मानकर  खुश होना छोड़ दें
सियासत नंगी होकर भारत माँ  के सर पे नाच रही है
तो क्या सियासत से हारकर  माँ से प्यार करना छोड़ दें !"
( आपके विचार सदा आमंत्रित ! आपका अवनीश !)




Monday, 17 September 2012

भाई बाज़ार बड़ा ही गरमाया हुआ है -  मुद्दा है की 2014  के लोकसभा चुनाव के बाद  या बीच में ही सरकार गिर गई और (मध्यावधि )  चुनाव हुए तो  कांग्रेस की तरफ से या बी.जे .पी की तरफ से प्रधानमंत्री का उम्मीदवार कौन होगा ! एक हैं  जो दलितों के यहाँ खाना खा कर पब्लिसिटी बटोरते हैं (चाची के काबिल पुत्र और एक मात्र युवा )  और एक है जो राम मंदिर की वकालत करते हैं (तोगड़िया के बाद एक मात्र जीवित हिन्दू )  ! राजा चाहे कोई भी हो बेचारी जनता तो घोर दलदल में हमेशा ही है - ! एक युवराज हैं जो महज़ 24 दिन देश की संसद में अपनी हाजिरी देते हैं पर फिर भी देश की सारी समस्याओं से वाकिफ हैं तो  दूसरे के दामन पे गोधरा का दाग लगा हुआ है ! प्रधानमंत्री पद के दोनों दावेदार साहब राजा चाहे जो हो  एक बात इस नासमझ की भी  समझ लीजिये "राजा का काम ये नहीं है वो दलितों के यहाँ खाना खाए बल्कि उसका काम ये है की  रात को अपने आलिशान बंगले में जब वो खाना खाए तो अपना दिमाग इस बात में लगाये की मेरे जैसा खाना इस देश के दलितों को कैसे और कब  मिलेगा ! राजा का काम ये भी नहीं है की वो देश  में मंदिर बनवाए बल्कि उसका काम ये होना चाहिए की पूरे देश को मंदिर बनाये ! इस देश का  प्रधानमंत्री कोई भी हो मेरा  गुस्सा इस बात से नहीं है  बल्कि  इस देश में युवा की परिभाषा लोगों को गलत और गलत तरीके से समझाई जा रही है मन में आक्रोश इस बात पे होता है ! 42 साल का  एक आदमी जो अपनी  कोलंबियन गर्लफ्रेंड के साथ FBI के हांथों 1,60,000 $ कैश के साथ  पकड़ा और नज़रबंद किया  जाता है उसको पूरे देश को युवा बताया जा रहा है  !  देश की की नहीं बल्कि दुनिया के  सर्वश्रेष्ठ संस्थानों  आईआईटी  और आई.आई .एम्  से पास आउट होने वाले क्या युवाओं के रोल मॉडल नहीं हो सकते जो देश सेवा के लिए सब कुछ त्याग सके या फिर उनका जन्म सिर्फ इसलिए हुआ है की गगनचुम्बी इमारतों के ए.सी . कमरे में बैठकर अंग्रेजी के भारी भारी शब्द बोलें और न्यूयार्क में बैठे किसी काले अँगरेज़ को सिर्फ ये समझाते रहे की महाशय आप अपना बिज़नेस   भारत  में कैसे बढ़ा सकते हैं  , फैसला आप कीजिये और मुझे बताइयेगा  जरुर  क्यूंकि उमीदें अभी भी आपकी बदौलत ही जिंदा हैं  फ़िलहाल मुझे "  राहत इन्दौरी" जी याद आ गए :
"सरहदों पे बहुत तनाव है क्या
कुछ पता तो करो चुनाव है क्या ?"
( इती श्री शुभ रात्रि - आपके जवाब की प्रतीक्षा में आपका अवनीश !)

Sunday, 16 September 2012


देश के गृहमंत्री जी का एक अहले सुबह बयान आया है : जिस तरह इस देश के लोग राजीव गाँधी वाले बोफोर्स घोटाले को भूल गए उसी तरह  इस कोयले घोटाले को भी भूल जायेंगे और हमारे काले हाँथ धुल जायेंगे ! पता नहीं भूलेंगे या नहीं पर मैंने नोबेल प्राइज देने वाली कमिटी को एक पत्र अभी शाम को लिख दिया है की इस साल से" बेशर्मी के लिए  नोबेल प्राइज "नामक एक  नया कैटेगरी नोबेल प्राइज की फेहरिश्त में जोड़ दिया जाये और इसका शुभारम्भ माननीय गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे से ही किया जाये ! हद हो गई यार , तवायफ भी कम से कम पुलिस की रेड में पकडे जाने के बाद अपना चेहरा छुपाती है (माफ़ कीजिये मेरी भाषा थोड़ी आज तल्ख़ है ) पर  इन्होने ने तो उसको भी पीछे छोड़ दिया ! कोई कार्टून बना दे तो इस देश के चर्चा चर्कवर्ती तथाकथित बुद्धिजीवी लोग उस पे राष्ट्रद्रोह का  मुकदमा दायर कर देते हैं और कोई १ करोड़ २५  लाख को  उनकी अक्ल और समझ के बारे में  भद्दा मजाक करे तो कोई नहीं इस देश में जो एक शब्द भी बोल सके ! आज एक बात का जवाब आप प्लीज  जरुर  देना : इस देश की जनता सर्बोपरी  है या इस देश का राष्ट्रीय चिन्ह और संबिधान ?" सचमुच देश एक लोकतान्त्रिक संकट के दौर से गुजर रहा है और अब हमें इन्हें बताना होगा कि :
"तेरी दीवार तेरी छत भी हिला सकता है
अपनी जिद पे आ जाये तो  पर्बत भी हिला सकता है
आपको पता नहीं है  है मेले में घुमने वाले "शिंदे" साहब
ये अवाम है अपनी जिद पे आ जाये तो हुकूमत भी हिला सकता है !"
( अब वक़्त  सिर्फ पोस्ट को देखते ही या पढ़कर like करने का नहीं रहा , आप भी अपना मुंह खोलिए और अगर मुझसे सहमत हों तो भी कुछ लिख कर बताइए और गर असहमत तो तब तो जरुर ही लिखिए , याद रखिये आपका मुझसे मतभेद हों सकता है पर मनभेद नहीं है , क्यूंकि आप सब मेरे हरदिल अज़ीज़ हैं !    आपका अवनीश  )!

Thursday, 13 September 2012

तीन राष्ट्रीय पर्वों के साथ साथ देश के एक और सबसे महत्वपूर्ण पर्व  "हिंदी दिवस" की आप सबों को  हार्दिक शुभकामनाएं ! दुनियां का प्यारा से प्यारा रिश्ता चाहे आपको कितना भी प्यार दे दे या कितनी भी बुलंदी पर आपको ले जाये पर जो प्यार और आपका अस्तित्व आप की माँ ने दिया है वो कोई नहीं दे सकता ! ठीक उसी तरह दुनियां की कोई भी भाषा चाहे आपकी तरक्की में कितनी ही बड़ी सहायक क्यूँ न हो पर आपकी और हमारी पहचान सिर्फ हिंदी से है और मनुष्य को अपना अस्तित्व और और अपनी पहचान कभी नहीं भूलनी चाहिए ! तो आइये हिंदी दिवस पर एक संकल्प लें की हम अपनी मातृभाषा को उतना ही सम्मान और प्यार देंगे जितना अपनी माँ को देते  हैं !
"हिंदी जन गन की भाषा है
जन मन की यह अभिलाषा है
भारत के बढ़ते चरणों की
यह ज्वलंत परिभाषा है
                    (भारतेंदु हरिश्चंद्र )!

( आशा है आप जरुर मेरी बातों का मर्म समझेंगे और अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान बनाये रखेंगे !  आपका अवनीश )






तुझे पाने की जुस्तजू है , या फिर तुझे खो देने का गम है

        तज्ब्जुब आज भी इसी बात में है

तूने जो दर्द दिया वो ताउम्र के लिए

इन्तिहाई थें या कम है !

(अवनीश )

Tuesday, 11 September 2012

चाहे चाटुकारी करो या मक्कारी करो
या इटली वाली चाची की  ताउम्र ताबेदारी करो
पर इस भारत  माता के पुत्र तुम भी हो सियासी भेड़ियों
थोड़ी सी गैरत शेष हो तो अब ईमान जगाओ
और तिल भर भी माँ के साथ वफादारी करो !
(अवनीश , शुभ रात्रि )

Monday, 10 September 2012

दोस्तों बड़ा ही डर लग रहा है कल से  इन सोशल वेबसाइटों पर कुछ भी लिखते हुए ! यार पता नहीं कब चेन्नई पुलिस हरकत में आ जाये और असीम त्रिवेदी की तरह मेरे पर भी देशद्रोह का मुकदमा दायर कर के जेल भेज दे ! अब मैं ना तो कोई क्रांतिकारी हूँ न ही इंडिया अगेंस्ट करप्सन का सदस्य ,मैं तो महज़ बहुराष्ट्रीय कम्पनी में ९ घंटे की शिफ्ट कर के लौटते ही चार रोटी खा के सोने वाला एक अदद इन्सान हूँ जो जेल चल गया तो घर , परिवार सबको दिक्कत हो जाएगी ! पर साथ ही साथ  मुझे ये भी पता है की मेरे  , आपके जैसे यही करोड़ों , अरबों लोग हैं जिनके साबुन , तेल , सब्जी आदि खरीदने पर लगे टैक्स के पैसे से देश के महामहिम राष्ट्रपति ६ करोड़ की मर्सिडीज़ बेन्ज़ में घूमते हैं और प्रधानमंत्री के हस्ताक्छर मात्र से (जिनके पी .एम्.ओ. के पैड पे भी अशोक स्तम्भ सरीखे राष्ट्रीय चिन्ह रहते हैं) इस देश की प्राकृतिक संपदा लुटाई जाती है और ए. राजा . १ लाख ७६ हज़ार करोड़ का बंदरबाट करते हैं ! चलो मैं मान भी लेता हूँ असीम ने बहुत बड़ा गुनाह किया है पर क्या देश की संसद भवन में नोटों की गड्डियाँ लहराने या मारपीट करने वाले या फिर देश के संसद के अन्दर बैठकर पोर्न फिल्म देखने वालों ने कोई गुनाह नहीं किया है ! क्या उन पे देशद्रोह का मुकदमा बिना चलाये ही  उनको फाँसी नहीं दे देनी चाहिए ! इसका निष्कर्ष आप ही निकाल कर मुझे बताएं , मैं तो बस चलते चलते इतना ही कहना चाहूँगा _
उनकी हर रात बीतती है दिवाली की तरह
और हमने एक दिया जलाया तो बुरा मान गए ,
हम आँह भी भरते हैं तो  हो जाते हैं बदनाम
वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती !
(आपके प्रतिउत्तर को आतुर आपका अवनीश ! शायद शुभ रात्रि !)
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Saturday, 8 September 2012

दिन भर न्यूज़ चैनल पर आज बस एक ही बात चलती रही - भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बातचीत सार्थक रही ,सम्बन्ध अच्छे होंगे आदि आदि !मैं ये तो नहीं जानता की सम्बन्ध अच्छे होंगे या नहीं क्यूंकि ये तो भारत में हुक्मरान और पाकिस्तान में लश्कर और हुजी ही तय करते हैं , पर इतना जरुर कहूँगा की दो भाईओं  के बीच जरुर कोई  तीसरा है जो हमारे संबंधों को कभी भी ठीक नहीं होने देना चाहता !शायद आप मेरा इशारा समझ गए होंगे और अब  जरुरत है उसकी गन्दी नज़र और मंसूबों को भी समझने की -
घर में जो आमद का बसर होने लगा
शायद माँ की दुवाओं का असर होने लगा
ये कैसी दोस्ती निभाई हम दोनों ने दोस्त
की रोटी का खर्च अब बंदूकों पर होने लगा !


KYA KHOYA KYA PAYA

किसी भी व्यक्ति के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए या तो उसके साथ रहना जरुरी है  , या फिर उसके बारे में उसके द्वारा या किसी और के द्वारा लिखी गई बातों को पढना ! कुछ ऐसा ही हुआ आज अटल बिहारी वाजेपाई जी को पढ़कर "क्या खोया क्या पाया " में ! पूरी पुस्तक की समीक्षा मैं बस एक पंक्ति  में करना चाहूँगा - "किसी कवि या लेखक के अन्दर का व्यक्तित्व कभी भी मर नहीं सकता चाहे वो कितना भी बड़ा राजनेता या अभिनेता क्यूँ न हो जाये ! इति श्री , शुभ रात्रि !
सपनों का टूटना बहुत ही बुरा होता है , पर उससे भी बुरा होता है एक सपना टूट जाने के बाद दूसरे सपने के बारे में सोच पाने की हिम्मत न जुटा  पाना ! बकौल अटल बिहारी वाजेपाई जी -
आदमी को चाहिए की वह जूझे
परिस्तिथियों से लड़े
एक स्वप्न टूटे
तो दूसरा गढ़े !

Sunday, 2 September 2012

Hi Everyone,

Today i have posted my first article or opinion on Google+ (my Blog.)-  http://awanisht28.blogspot.in/       . you can contact me or go through my articles , poems, opinions and post your feedback, comments here as well.

जंगल "Raj"


देश के अन्दर नहीं बल्कि देश के साथ भ्रस्टाचार करने वाले राज ठाकरे के लिए मेरी तरफ से (बल्कि तमाम बिहारवासियों और समस्त भारतवासी जो राज ठाकरे को सर्कस के शेर के अलावा कुछ भी नहीं समझतें ) की तरफ से चार पंक्तियाँ -

वो नफरतों का दिया मुसल्सल जलाते रहें
हमारे प्यार की छोटी सी चिराग उन पे भारी है
क्यूंकि उनके तो खानदानी रग ही में सियासत और नफरत है
हम तो बुद्ध और महावीर के भोले बिहारी हैं !